
- यह भत्ता राज्य सरकार के अधीनस्थ समस्त स्थाई कर्मचारियों को देय होता है। लेकिन दैनिक वेतन भोगी या संविदा पर कार्यरत अस्थाई कर्मचारियों को व परीवीक्षाधीन कर्मचारियों को इस भत्ते का लाभ देय नहीं है।
- यह भत्ता किसी भी कार्मिक को उसके मूल वेतन के कुछ प्रतिशत हिस्से के रूप में ही देय होता है। जैसे वर्तमान में 10 प्रतिशत न्यूनतम देय है।
कब देय नहीं है :
- यदि कर्मचारी सरकार के स्वामित्व वाले पट्टे पर लिये गए अथवा अधिग्रहित आवास में रहता है या अन्य विभाग के आवास में रहता है या सरकारी भवन जैसे सर्किट हाउस या हॉस्टल में रहता है।
- यदि कर्मचारी, देवस्थान विभाग या किसी अन्य राजकीय विभाग के आवास में रहता है।
- यदि कर्मचारी, नगर विकास न्यास, नगरपालिका, स्थानीय निकाय संस्था या स्वायतशासी संस्था के स्वामित्व वाले आवास में रहता है।
- यदि कर्मचारी, सरकारी आवास का आवंटन स्वीकार कर लेता है तो निवास प्रारंभ करने के दिन से या स्वीकृति की दिनांक के पश्चात आठवें दिन से, जो भी पहले हो तो भी भत्ता देय नहीं होगा।
कब देय होगा :
- यदि कर्मचारी किराये के मकान में रह रहा हो।
- यदि कर्मचारी अपने स्वयं/पति/पत्नी/माता/पिता/बच्चे के स्वामित्व वाले मकान में या हिन्दू अविभाजित परिवार के स्वामित्व वाले मकान में रहता है तब भी उसे मकान किराया भत्ता नियमों के नियम 5 में दी गई दरों पर मकान किराया भत्ता मिलेगा। लेकिन इसके लिए इस आशय का प्रमाण-पत्र देना होगा कि वह उक्त मकान या संपत्ति कर के चुकाने में या मकान या संपत्ति के रखरखाव में पूर्ण या आंशिक रूप से हिस्सेदार है।
- यदि पति-पत्नी दोनों राज्य सेवा में हो और एक ही स्थान पर नियुक्त हों तो दोनों को ही मकान किराया भत्ता देय होगा, चाहे वे एक ही किराये के अथवा खुद के मकान में रहते हों। हालांकि दोनों को मकान किराया भत्ता के लिए अलग-अलग आवेदन करना अनिवार्य होगा।
- लेकिन वित्त विभाग राजस्थान के परिपत्र दिनांकित 30.01.2017 व उच्च न्यायालय राजस्थान के निर्णय दिनांक 05.12.2016 के क्रम में यह भी लागू है कि यदि राजकीय सेवा में सेवारत पति-पत्नी जो एक ही मुख्यालय पर पदस्थापित है तथा एक ही मकान में रहते हैं, इस स्थिति में उनमें से एक का ही मकान किराया भत्ता अर्थात् दोनों में से जिसे अधिक भत्ता देय हो वही दिया जायेगा।
- यदि कर्मचारी निवास प्रारंभ करने की दिनांक से एक माह के अंदर आवेदन करता है तो मकान किराया भत्ता निवास प्रारंभ करने की तिथि से देय होगा।
- मान लीजिए यदि कर्मचारी का उसके नियुक्ति स्थान पर अपना स्वयं का मकान है किन्तु वह किसी अन्य किराये के मकान में रहता है तो उस किराये के मकान के लिए वह किराया भत्ता प्राप्त करने का अधिकारी है।
मकान किराये भत्ते की दरें : मकान किराया हर कर्मचारी को शहर के अनुसार ही देय है। इस हेतु शहरों की जनसंख्या के आधार पर उनके वर्ग Y & Z बनाये गये हैं।
| वर्ग | प्रकार | दर |
| Y | 05 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (बीकानेर,जोधपुर,कोटा,अजमेर,जयपुर) | 16% |
| Z | 05 लाख से कम जनसंख्या वाले शहर, कस्बे,गाँव (ऊपर की पंक्ति में लिखे शहरों के अलावा) | 8% |
| वर्ग | प्रकार | दर |
| Y | 05 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (बीकानेर,जोधपुर,कोटा,अजमेर,जयपुर) | 18% |
| Z | 05 लाख से कम जनसंख्या वाले शहर, कस्बे,गाँव (ऊपर की पंक्ति में लिखे शहरों के अलावा) | 9% |
| वर्ग | प्रकार | दर |
| Y | 05 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर (बीकानेर,जोधपुर,कोटा,अजमेर,जयपुर) | 20% |
| Z | 05 लाख से कम जनसंख्या वाले शहर, कस्बे,गाँव (ऊपर की पंक्ति में लिखे शहरों के अलावा) | 10% |
विशेष परिस्थितियों में मकान किराया भत्ता की देयता :
अवकाश /अस्थाई स्थानान्तरण के स्थिति में :-
- अवकाश/अस्थाई स्थानान्तरण की स्थिति में पूर्व निर्धारित दरों के अनुसार ही मकान किराया भत्ता देय होगा।
- अवकाश से तात्पर्य सेवानिवृत्ति पूर्व अवकाश सहित समस्त प्रकार के अवकाश जो 120 दिन से अधिक न हो परंतु असाधारण अवकाश, अध्ययन अवकाश व अस्वीकृत अवकाश शामिल नहीं होेंगे।
- T.B./Cancer/कुष्ठ/मानसिक रोग के आधार पर दिये गये अवकाश के लिए यह सीमा 240 दिन होगी।
- मातृत्व अवकाश की स्वीकृति के मामले में यह 180 दिन तक बढाया जा सकेगा।
- अस्थाई स्थानान्तरण जो 4 माह से अधिक नहीं हो। यदि बाद में यह अवधि चार माह से अधिक बढाई जाती है तो 4 माह की सीमा को मानते हुए आदेश की दिनांक तक मिलता रहेगा।
कार्यग्रहण काल में :
- स्थानान्तरण के पूर्व के स्थान पर मिलने वाली दर देय होगा।
- यदि स्थानान्तरण के बाद नये स्थान पर सरकारी कर्मचारी को न तो किराया का मकान उपलब्ध हो और ना ही आवास आवंटित हो तथा वह पुराने स्थान पर ही किराये के मकान में रह रहा हो तो उस स्थिति में स्थानान्तरण के पूर्व के स्थान पर मिलने वाली दर पर नये स्थान पर कार्यभार लेने की दिनांक से 6 माह तक या नये स्थान पर किराये के मकान लेने की तिथि तक या सरकारी आवास आवंटित होने की तिथि तक जो भी पहले हो मकान किराया भत्ता देय होगा।
- पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) – यदि कर्मचारी पदस्थापन की प्रतीक्षा (APO) में हो तो उसे उस स्थान पर लागू नियमों के अनुसार देय होगा।
- प्रशिक्षण काल में भी पूर्व में निर्धारित दरों के अनुसार ही यह भत्ता देय होगा।
- यदि कर्मचारी निलंबित हो जाये तो व सरकारी कर्मचारी का मुख्यालय जनहित में परिवर्तित किया जाये तो नये स्थान पर लागू नियमों के अनुसार मकान किराया भत्ता देय होगा। लेकिन यदि कर्मचारी के आवेदन पर मुख्यालय परिवर्तित किया जाये तो नये स्थान पर देय मकान किराया भत्ता अथवा पूर्व स्थान पर देय मकान किराये भत्ते में से जो भी कम होगा, वही देय होगा।


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