राजस्थान सेवा नियम में उपार्जित अवकाश के विभिन्न प्रावधानों का वर्णन किया गया है। इस पोस्ट के माध्यम से आपको उपार्जित अवकाश से संबंधित समस्त प्रावधानों की विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।
राजस्थान सेवा नियम के नियम 7 (28) के अनुसार सेवा में व्यतीत किये गये समय के आधार पर अर्जित अवकाश उपार्जित अवकाश कहलाते हैं। बकाया उपार्जित अवकाश का आशय नियम 91, 92 या 94 द्वारा अर्जित अवकाश के दिनों की संख्या से हैं। अवकाशों की संख्या निकालते समय सेवा में जितने समय के अवकाशों का उपयोग किया गया है, उतना समय कम कर दिया जाता है।
नियम 69: वैदेशिक सेवा में 120 दिन से ज्यादा के उपार्जित अवकाश लेना चाहे तो कार्मिक को अपना अवकाश आवेदन प्रपत्र महालेखाकार कार्यालय में प्रेषित करना होगा तथा आवेदन पत्र की जांच के बाद ही वैदेषिक नियोजक द्वारा उसे अवकाश दिया जायेगा।
नोट: कर्मचारी का यह व्यक्तिगत दायित्व है कि वह अपने उपार्जित अवकाश के लेखे का संधारण करे।
नियम 91(1)(क): राज्य कर्मचारी जो स्थाई या अस्थाई है, को एक केलेण्डर वर्ष में 30 दिन का उपार्जित अवकाश देय होगा लेकिन भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों को छोड़कर राजस्थान सषस्त्र पुलिस के सदस्य जो भारतीय रिजर्व बटालियन में तैनात है, को केलेण्डर वर्ष में 42 दिन का उपार्जित अवकाश देय होगा।
नियम 91(1)(ग): 01 जनवरी 1998 से कर्मचारी अपने लेखों में 300 दिनों का उपार्जित अवकाश जमा रख सकता है।
नियम 91(2)(a)(i): प्रत्येक राज्य कर्मचारी के उपार्जित अवकाश लेखों में प्रत्येक केलेण्डर वर्ष में दो बार, 01 जनवरी को 15 तथा 01 जुलाई को 15 दिन के उपार्जित अवकाश अग्रिम के रूप में जमा किये जायेंगे। लेकिन राजस्थान सषस्त्र पुलिस के कार्मिकों के मामलों में एक बार में 15 दिन की बजाय 21 दिन में उपार्जित अवकाश जमा किये जायेंगे चाहे वह लीप वर्ष हो या दूसरा।
वित्त विभाग की अधिसूचना क्रमांक: एफ.1(4)वि.वि./नियम/98 दिनांक 12.12.2012 द्वारा नियम नियम 91(2)(a)(i) के नीचे एक परंतुक जोड़कर दिनांक 01 जनवरी 2013 से यह प्रावधान किया गया है कि यदि किसी राज्य कर्मचारी का उपार्जित अवकाश 31 दिसंबर व 30 जून को 300 दिवस या कम लेकिन 285 से अधिक जमा है वहां 01 जनवरी व 01 जुलाई को 15 अग्रिम उपार्जित अवकाश लेखे का पृथक से संधारण किया जायेगा। उदाहरण के लिये यदि किसी राज्य कार्मिक की सेवा पुस्तिका में 30 जून या 31 दिसंबर की तिथि को कुल उपार्जित अवकाश की संख्या माना कि 288 या 292 है तो 01 जुलाई या 01 जनवरी को 15 दिवस का अग्रिम उपार्जित अवकाश जोड़ने हेतु हमें सेवा पुस्तिका में पहले 288 में 12 या 292 में 08 जोड़ कर कुल योग 300 करना होगा तथा इसके उपरान्त शेष बचे हुए उपार्जित अवकाश को 300+5 या 300+8 के रूप में दर्ज करना होगा।
नियम 91(2)(b): यदि कोई कर्मचारी किसी केलेण्डर वर्ष की एक छमाही में असाधारण अवकाश पर रहता है तो उसके उपार्जित अवकाश के खाते में प्रत्येक 10 दिन के असाधारण अवकाश पर एक दिन का उपार्जित अवकाश कम कर दिया जायेगा, जिसकी सीमा 15 दिन से अधिक नहीं होगी तथा सषस्त्र पुलिस कर्मियों के मामलों में 21 दिन से अधिक नहीं होगी। अन्य किसी भी प्रकार के अवकाशों के उपभोग पर उपार्जित अवकाश कम नहीं किये जायेंगे।
नियम 91(3): सेवा नियम 59 के प्रावधानों को ध्याम में रखते हुए एक राज्य कर्मचारी को एक समय में अधिकतम 120 दिन का उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा। यदि उसके ऐसा अवकाश किसी मान्यता प्राप्त सेनिटोरियम/अस्पताल में टी.बी., केैंसर, कोढ़ या मानसिक रोग के निदान के लिए आवश्यक हो तो एक समय में 300 दिन का उपार्जित अवकाश देय होने पर स्वीकृत किया जा सकता है।
नियम 91(4)(क): यदि कोई राज्य कर्मचारी किसी केलेण्डर वर्ष की किसी छमाही में राज्य सेवा में नियुक्त होता है तो उसको प्रत्येक पूर्ण माह की सेवा पर 2.5 दिन का उपार्जित अवकाश देय होगा। सषस्त्र पुलिस कर्मियों के मामलों में यह 3.5 दिन का देय होगा।
नियम 91-A(1): एक राज्य कर्मचारी 01 अप्रेल से प्रारंभ वित्त वर्ष में अधिकतम 15 दिनों का उपार्जित अवकाश एक बार में समर्पित करके उसके एवज में उतने दिनों का नकद भुगतान प्राप्त कर सकता है तथा उन अधिकतम 15 दिवस के अवकाशों को सेवा पुस्तिका में कुल अवकाशों में से घटा दिया जायेगा। समर्पित किये गये उपार्जित अवकाशों के एवज में अवकाशों के एवज में अवकाश वेतन भुगतान सेवा नियम 97 के प्रावधानों के आधार पर किया जायेगा। इसका अंकन सेवा पुस्तिका में लाल स्याही से किया जायेगा।
नियम 91C(क) : सेवा में रहते हुए सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उन उपार्जित अवकाशों का एक मुस्त भुगतान उसकी विधवा/बच्चों को किया जायेगा जो मृत्यु होने की तारीख से मृतक सरकारी कर्मचारी को देय हो। नकद भुगतान की विधि नियम 91ख (4) के अनुसार ही संगणित किया जायेगा।
विश्रामकालीन विभागों के अधिकारियों के लिए विशिष्ट नियम:
नियम 92(a)(ii) : विद्यालयों, पॉलीटेक्निक, कला व विज्ञान महाविद्यालयों के अध्यापन स्टाफ को केलेण्डर वर्ष में 15 के अनुपात में उपार्जित अवकाश देय होंगे। प्रत्येक केलेण्डर वर्ष की समाप्ति के तुरंत बाद 15 उपार्जित अवकाश प्रत्येक सरकारी कर्मचारी के खाते में जोड़ दिये जायेंगे।
नियम 92(a)(ii): किसी केलेण्डर वर्ष में नियुक्त किये सरकारी कर्मचारी को उस केलेण्डर वर्ष की समाप्ति के तुरंत बाद उसकी सेवा में पूर्ण किये गये प्रत्येक माह के लिए 1.25 दिन की दर से देय है।
नियम 92 (b): जिस वर्ष विश्रामकालीन विभागों में कार्यरत अध्यापक वर्ग को विश्रामकाल के उपभोग पूर्णतः नहीं करने दिया जाये तो उस वर्ष उन्हें अन्य सामान्य श्रेणी का कर्मचारी मानकर सेवा नियम 91 के प्रावधानों के अनुसार उपार्जित अवकाश दिया जायेगा। उस वर्ष उन्हें ऐसे अनुपयोगी विश्राम काल के एवज में 15 के अनुपात (03 दिवस के बदले 01 उपार्जित अवकाश) में उपार्जित अवकाश दिये जायेंगे।
देय/स्वीकार्य अवधि से कम समय के कार्य ग्रहणकाल के उपभोग पर उपार्जित अवकाशों की सुविधा:
नियम 6(1) के अनुसार जब एक कर्मचारी उसे देय/स्वीकार्य कार्य ग्रहणकाल से कम अवधि का उपभोग करके नवीन पद पर कार्यग्रहण कर ले तो उसे नियमानुसार देय तथा वास्तव में उपभोग किये गये कार्यग्रहण काल के अंतर को, अधिकतम 15 दिन के समय को उपार्जित अवकाश के लेखों में जोड़ दिया जायेगा।
